भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक class 10 notes

याद रखने योग्य बाते :-

1. आर्थिक गतिविधि ऐसे क्रियाकलाप जिनको करके जीवनयापन के लिए आय की प्राप्ति की जाती है।

2. प्राथमिक क्षेत्रक – वह क्षेत्रक है जिसमे प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करके वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है। इसे कृषि व सहायक क्षेत्रक भी कहा जाता है।

3. द्वितीयक क्षेत्र – वह क्षेत्र जिसमें प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त वस्तुओं को लेकर नए वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं।

4. तृतीयक क्षेत्रक या सेवा क्षेत्रक- प्राथमिक व द्वितीयक क्षेत्र के लिए उत्पादन सहायक गतिविधियों में सहायता करता है। इसे सेवा क्षेत्र भी कहते हैं।

5. सेवा क्षेत्रक में उत्पादन सहायक गतिविधियों के अतिरिक्त अन्य सेवाएं भी हो सकती है। जैसे – डॉक्टर, वकील आदि की सेवा, कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर विकसित करना आदि।

6. सार्वजनिक क्षेत्र – जिसमें अधिकांश परिसंपत्तियों पर सरकार का स्वामित्व होता है और सरकार ही सभी सेवाएं उपलब्ध करवाती हैं।

7. निजी क्षेत्र – वह क्षेत्र जिसमें परिसंपत्तियों का स्वामित्व और सेवाओं का वितरण एक व्यक्ति या कंपनी के हाथों में होती है।

8. सकल घरेलू उत्पाद – किसी विशेष वर्ष में प्रत्येक क्षेत्रक के द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं व सेवाओं का मूल्य उस वर्ष में क्षेत्र के कुल उत्पादन की जानकारी प्रदान करता है।

9. भारत में पिछले 40 वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि तृतीयक क्षेत्रक में हुई है।

10. इस तीव्र वृद्धि के कई कारण हैं जैसे- सेवाओं का समुचित प्रबंधन, परिवहन, भंडारण की अच्छी सुविधाएं, व्यापार का अधिक विकास, शिक्षा की उपलब्धता आदि।

11. कृषि क्षेत्र में अल्प बेरोजगारी की समस्या अधिक है अर्थात् यदि हम कुछ लोगों को कृषि क्षेत्र से हटा भी देते हैं तो उत्पादन में विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।

12. इसे प्रच्छन्न या छिपी हुई बेरोजगारी भी कहा जाता है।

13. शिक्षित बेरोजगार जब शिक्षित, प्रशिक्षित व्यक्तियों को उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिलता।

14. कुशल श्रमिक – जिसने किसी कार्य के लिए उचित प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अकुशल श्रमिक- जिन्होंने कोई प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है।

15. संगठित क्षेत्रक – वे उद्यम या कार्य आते हैं, जहाँ रोजगार के अवधि निश्चित होती है। यह सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं तथा निर्धारित नियमों व भी नियमों का अनुपालन करते हैं।

16. असंगठित क्षेत्रक – छोटी-छोटी और बिखरी हुई इकाइयां, जो अधिकांशतः सरकारी नियंत्रण से बाहर रहती है, से निर्मित होता है। यहां प्रायः सरकारी नियमों का पालन नहीं किया जाता।

17. दोहरी गणना की समस्या – यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब राष्ट्रीय आय की गणना के लिए सभी उत्पादों में उत्पादन मूल्य को जोड़ा जाता है। क्योंकि इसमें कच्चे माल का मूल्य भी जुड़ जाता है। अतः समाधान के लिए केवल अंतिम उत्पाद के मूल्य की गणना की जानी चाहिए।

18. असंगठित क्षेत्रक – भूमिहीन किसान, कृषि श्रमिक, काश्तकार, बँटाईदार, शिल्पी आदि। शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक श्रमिक, निर्माण श्रमिक, व्यापार व परिवहन में कार्यरत, कबाड़ व बोझा ढोने वाले लोगों को संरक्षण की आवश्यकता होती है।

19. ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 – केंद्रीय सरकार ने भारत के 200 जिलों में काम का अधिकार लागू करने का एक कानून बनाया है।

20. काम का अधिकार – सक्षम व जरूरतमंद बेरोजगार ग्रामीण लोगों को प्रत्येक वर्ष 100 दिन के रोजगार की गारंटी सरकार के द्वारा। असफल रहने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।

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