दोहे बिहारी प्रश्न और उत्तर Class 10

NCERT Solutions For Class 10 Hindi Sparsh Dohe Bihari Questions and Answers

प्रश्न- अभ्यास

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

प्रश्न1. छाया भी कब छाया ढूँढ़ने लगती है?

उत्तर: कवि के अनुसार जब जून के महीने में अत्यधिक गर्मी होती है तो उस समय छाया भी धूप से बचने के लिए घने जंगलों व घरों के अंदर चली जाती है अर्थात छाया भी छाया की तलाश करती है।

प्रश्न2. बिहारी की नायिका यह क्यों कहती है ‘कहि है सबु तेरौ हियौ, मेरे हिय की बात’ – स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: नायक नायिका से दूर है क्योंकि वह परदेस गया हुआ है। नायिका, नायक को अपनी विरह दशा के बारे में पत्र लिखकर सूचित करना चाहती है परंतु वह यह करने में अपने आप को असमर्थ पाती है। और लज्जा के कारण वह यह बात किसी और से भी बता नहीं पा रही। इसलिए वह कहती है कि नायक का प्रेम भी अगर नायिका की तरह सच्चा है तो नायक का हृदय नायिका की दशा का आभास कर लेगा।

प्रश्न3. सच्चे मन में राम बसते हैं-दोहे के संदर्भानुसार स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कवि का मानना है कि सच्चे मन से और सच्ची भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति की जा सकती है ना कि झूठे आडंबरों से या झूठे मन से। क्योंकि जिसका मन सच्चा नही होता वह भौतिक सुख और विषय-वासनाओं में ही उलझा रहता है। मनको को गिनना, मंदिर, मस्जिद चर्च जाने से ईश्वर नहीं मिलते।

प्रश्न4. गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी क्यों छिपा लेती हैं?

उत्तर: जब श्री कृष्ण बांसुरी बजाने लगते है तो उसमें ही मस्त हो जाते है जिससे गोपियां उनसे बात नही कर पाती। लेकिन जब गोपियां श्री कृष्ण की बांसुरी को छिपा देती है तब गोपियां बांसुरी के बहाने उनसे बातें करने लगती है। इसलिए गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी को छिपा लेती हैं।

प्रश्न5. बिहारी कवि ने सभी की उपस्थिति में भी कैसे बात की जा सकती है, इसका वर्णन किस प्रकार किया है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: बिहारी कवि ने सभी की उपस्थिति में भी कैसे बात की जा सकती है, इसका वर्णन इस तरह से किया है जैसे प्रेमी और प्रेमिका आंखो ही आंखों में बिना किसी को पता चले एक दूसरे की बातों तो जान लेते है। उन्हें कुछ मुंह से बोलने की जरूरत नहीं पड़ती और किसी को उनकी उस सांकेतिक भाषा की भी खबर नहीं लगती।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए

1. मनौ नीलमनि-सैल पर आतपु पर्यो प्रभात।

उत्तर: इस पंक्ति का भाव है की श्री कृष्ण का शरीर नीला है जिसमे उन्होंने पीले वस्त्र औढ़ रखे है। जो ऐसे प्रतीत होते है जैसे नीलमणि पर्वत पर सूर्य की कितने शोभायमान हो रही हों।

2. जगतु तपोवन सौ कियौ दीरघ-दाघ निदाघ।

उत्तर: कवि के कहने का अर्थ है की ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की गर्मी के प्रचंड ताप से संपूर्ण वन, तपोवन जैसा बन गया है। जिसके कारण सभी में आपसी वैर-भाव खत्म हो गया है और मैत्री भाव का विकास हुआ है। 

3. जपमाला, छाप, तिलक सरै न एकौ कामु। मन-काँचै नाचे वृथा, साँचै राँचै रामु।।

उत्तर: कवि के कहने का अर्थ है की माला जपने से, मस्तक पर तिलक लगाने से ईश्वर को नहीं पाया जा सकता है क्योंकि यह सभी आडंबर हैं। अगर कोई ईश्वर को प्राप्त करना चाहता है। तो उसे मन को सच्चा तथा सच्ची श्रद्धा और लगन से ईश्वर को याद करना चाहिए। क्योंकि ईश्वर तो सच्चे मन में निवास करते हैं।

योग्यता विस्तार

प्रश्न1. सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर। 

देखन में छोटे लगै, घाव करें गंभीर।।

अध्यापक की मदद से बिहारी विषयक इस दोहे को समझने का प्रयास करें। इस दोहे से बिहारी की भाषा संबंधी किस विशेषता का पता चलता है?

उत्तर: कवि बिहारी ने इस दोहे में ब्रजभाषा का सरलता, कोमलता और मधुरता से उपयोग किया है। उन्होंने इस दोहे में रसों और अलंकारों का भी प्रयोग किया है। रस – श्रृंगार रस और भक्ति रस।

अलंकार – अनुप्रास, रूपक, उपमा और उत्प्रेक्षा अलंकार।

कवि बिहारी कम शब्दों में अधिक बात कहने में निपुण है। और हम यह कह सकते हैं कि वे गागर में सागर भरने की कला में सिद्धहस्त हैं।

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