जल संसाधन प्रश्न और उत्तर Class 10

Jal Sansadhan Questions and Answers Class 10

प्रश्न 1. बहुवैकल्पिक प्रश्न:-

i. नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को ‘जल की कमी से प्रभावित’ या ‘जल की कमी से अप्रभावित’ में वर्गीकृत कीजिए।

क) अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र

ख)अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र

ग)अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र

घ)कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र

उत्तर- (क) जल की कमी से अप्रभावित।

(ख) जल की कमी से प्रभावित।

(ग) जल की कमी से प्रभावित।

(घ) जल की कमी से अप्रभावित।

ii. निम्नलिखित में कौन सा वक्तव्य बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिया गया तर्क नहीं है?

क) बहुउद्देशीय परियोजनाएं उन क्षेत्रों में जल लाती हैं जहां जल की कमी होती।

ख) बहुउद्देशीय परियोजनाएं जल बहाव को नियंत्रित करके बाढ़ पर काबू पाती है।

ग) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

घ) बहुउद्देशीय परियोजनाएं हमारे उद्योग और घरों के लिए विद्युत पैदा करती है।

उत्तर-(ग) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत् स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

iii. यहां कुछ गलत वक्तव्य दिए गए हैं। इनमें गलती पहचाने और दोबारा लिखें।

क) शहरों की बढ़ती संख्या उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवनशैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है।

ख) नदियों पर बांध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता। 

ग) गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर भी किसान नहीं भड़के।

घ) आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।

उत्तर- क) शहरों में बढ़ती संख्या उनके विशालता और सघन जनसंख्या तथा उनके परिणाम स्वरूप जल की बढ़ती मांग और उसके असमान वितरण का परिणाम हो सकता है। पानी अधिक जनसंख्या के लिए घरेलू उपयोग में नहीं बल्कि अधिक अनाज उगाने के लिए भी आवश्यक है। अतः अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए जल संसाधनों का अति शोषण करके ही सिंचित क्षेत्र में वृद्धि की जा सकती है। तथा सूखे क्षेत्रों में भी खेती की जा सकती है । कृषि में जल का सबसे ज्यादा उपयोग होता है । तथा इसके अलावा अतिरिक्त शहरों की बढ़ती संख्या और जनसंख्या तथा शहरी जीवन-शैली के कारण जल और ऊर्जा की आवश्यकता में बढ़ोतरी के साथ-साथ इनमें संबंधित समस्याएं और भी गहरी हुई हैं, शहरों में जल संसाधनों का अति शोषण हो रहा है और दिन प्रतिदिन इसकी कमी होती जा रही है।

ख) नदियों पर बांध बनाने और उनको नियंत्रित करने से परंपरागत बांध नदियों तथा वर्षा के पानी को इकट्ठा करने के बाद उसे खेतों की सिंचाई के लिए उपलब्ध करवाते थे। आजकल बांध सिंचाई के साथ-साथ अनेक कारण जैसे विद्युत उत्पादन घरेलू और औद्योगिक उपयोग, जलापूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक शौचालय तथा मछली पालन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए बांधों को बहुउद्देशीय परियोजना भी कहा जाता है। इससे उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव प्रभावित नहीं होता।

ग) गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान नगरीय क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति देने के कारण परेशान किसान उपद्रव पर उतारू हो गए। बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लागत तथा लाभ के बंटवारे को लेकर अंतरराष्ट्रीय झगड़े आम होते जा रहे हैं इसलिए अधिक जलापूर्ति करने पर परेशान किसान उपद्रव पर उतारू हो गए।

घ) आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के कारण छत वर्षा जल संग्रहण की लोकप्रियता कम होती जा रही है। हालांकि कुछ घरों में टैंको की सुविधा आज भी है। क्योंकि उन्हें नल के पानी का स्वाद पसंद नहीं है। सौभाग्य से आज भी भारत के कई ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण और संग्रहण की यह विधि प्रयोग में लाई जा रही है और जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए‌।

i) व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है?

उत्तर- पृथ्वी का तीन चौथाई हिस्सा धरातल पानी से ढका हुआ है, लेकिन इनमें से उपयोग मे लाने योग्य अलवणीय जल का अनुपात बहुत कम है। यह अलवणीय जल हमें सतही अपवाह और भोमजल स्रोत से प्राप्त होता है जिनका लगातार नवीकरण तथा पुनर्भरण जलीय चक्र द्वारा होता है, सारा जल जलीय चक्र में गतिशील रहता है। जिससे जल नवीकरण सुनिश्चित होता है तथा जल एक नवीकरण संसाधन है।

ii) जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या है?

उत्तर. जल दुर्लभता अत्यधिक और लगातार बढ़ती जनसंख्या तथा उसके परिणाम स्वरूप जल की बढ़ती मांग और उसके असमान वितरण का परिणाम हो सकता है। पानी अधिक जनसंख्या के लिए घरेलू उपयोग में ही नहीं बल्कि, अधिक अनाज उगाने के लिए भी आवश्यक है। लेकिन प्रदूषण के कारण वह मनुष्य के लिए हानिकारक होता है।

जल की दुर्लभता के निम्नलिखित कारण हैं :-

क) जल संसाधनों से अत्यधिक शोषण।

ख) परिस्थितिक संकट की समस्या उत्पन्न हो सकती है। जिसका हमारे जीवन पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।

iii) बहुउद्देशीय परियोजनाओं से होने वाले लाभ और हानियों की तुलना करें।

उत्तर- बहुउद्देशीय परियोजना से होने वाले लाभ:-

क) बहुउद्देशीय परियोजना सिंचाई एवं जल विद्युत उत्पादन दोनों के काम में आती हैं।

ख) बहुउद्देशीय परियोजना काल में बनी बाधाओं को पार करते हुए देश को विकास तथा स्मृति के रास्ते पर लाने वाली परियोजना है।

ग) इस प्रकार की परियोजनाएँ उन क्षेत्रों में  जल लाती है। जहां जल की ज्यादातर कमी होती है।

घ)बहुउद्देशीय परियोजना उन सारे क्षेत्रों में यह मृदा अपरदन को भी रोकती हैं।

च) बहुउद्देशीय परियोजनाएं बाढ़ जैसे खतरनाक खतरे को रोकने में सहायक है।

छ) बहुउद्देशीय परियोजना मछली पालन एवं नौकायन के लिए भी प्रयोग में आती हैं।

बहुउद्देशीय से परियोजनाओं से होने वाली हानि:-

क) नदी पर बांध बनने तथा उनका बहाव नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव बाधित होता है।

ख) जिसके कारण तलछट बहाव कम हो जाता है।

ग) बाढ़ के मैदान में बनाए जाने वाले जलाशयों द्वारा वहां मौजूद वनस्पति और मिट्टी डूब जाती हैं, जो कालांतर में अपघटी हो जाती है।

घ) बांध नदियों को टुकड़ों में बांट देते हैं, जिससे विशेषकर  क्षेत्रो में जलीय जीवो का नदियों में स्थानांतरण बाधित हो जाता है।

च) बहुउद्देश्य परियोजना से बहुत अधिक जनसंख्या में लोगों का विस्थापन होता है।

प्रश्न3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।

i) राजस्थान के अर्थ शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर. राजस्थान के अर्धशुष्क तथा शेष क्षेत्रों विशेषकर बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर में लगभग हर घर में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक अथवा टांका हुआ करते थे। टांका यहां के विकसित छत वर्षा जल संग्रहण तंत्र का अभिन्न हिस्सा होता है। इसे मुख्य घर या आंगन में बनाया जाता है। वह घरों की छतों में पाइप द्वारा जुड़े हुए होते थे। छत से वर्षा का पानी इन पाइप से होकर भूमिगत टांका तक पहुंचता था। जहां इसे एकत्रित किया जाता था। वर्षा का पानी अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा सकता है। यहां ये पानी की कमी वाली ग्रीष्म ऋतु तक पीने का पानी उपलब्ध करवाने वाला जल स्त्रोत है। वर्षा जल को इन क्षेत्रों में ‘पालर पानी’ के नाम से पुकारा जाता है। इसे प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप समझा जाता है। पर यह अफसोस की बात है कि आज पश्चिमी राजस्थान में छत वर्षा जल संग्रहण की पुरानी विधि में ‘इंदिरा गांधी’ नहर से उपलब्ध बारहमासी पेयजल के कारण कमी होती जा रही है।  

ii) परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपनाकर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है?

उत्तर. वर्षा जल संग्रहण की नीतियों को आधुनिक काल में अपनाकर जल संरक्षण एवं भंडार कुछ इस प्रकार है:-

आवश्यकतानुसार वर्षा जल, भोम जल, नदी तथा बाढ़ जल संरक्षण के अनेक तरीकों को विकसित कर लिया गया है। पहाड़ी तथा पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों ने कुल अथवा नदी की धारा का रास्ता बना कर खेतों में सिंचाई के लिए बनाई है। पश्चिमी बंगाल में बाढ़ के दौरान लोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ जल वाहियाएँ बनाते हैं।

शुष्क तथा अर्धशुष्क क्षेत्रों में खेतों में वर्षा जल इकट्ठा करने के लिए गड्ढे बनाए जाते थे। ताकि मृदा को सूचित किया जा सके और संरक्षित जल को खेती के उपयोग में लाया जा सके।

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