कृषि प्रश्न और उत्तर कक्षा 10

NCERT Solutions for Class 10 Social Science in Hindi Medium Krishi Questions and Answers

प्रश्न1. बहुवैकल्पिक प्रश्न-

i) निम्नलिखित में से कौन-सा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है?
क) स्थानांतरी कृषि
ख) रोपण कृषि
ग) बागवानी
घ) गहन कृषि

उत्तर. रोपण कृषि

ii) इनमें से कौन-सी रबी फसल है।
क) चावल
ख) मोटे अनाज
ग) चना
घ) कपास

उत्तर. चना

iii) इनमें से कौन -सी एक फलीदार फसल है?
क) दालें
ख) मोटे अनाज
ग) ज्वार
घ) तिल

उत्तर. दालें

iv) सरकार निम्नलिखित में से कौन-सी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है?
क) अधिकतम सहायता मूल्य
ख) न्यूनतम सहायता मूल्य
ग) मध्यम सहायता मूल्य
घ) प्रभावी सहायता मूल्य

उत्तर. न्यूनतम सहायता मूल्य

प्रश्न2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 80 शब्दों में दीजिए।

क) एक पेय फसल का नाम बताएं तथा उसको उगाने के लिए अनुकूलन भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।

उत्तर. चाय एक पेय फसल है। इसे शुरुआत में अंग्रेजों द्वारा भारत में लाया गया था। आज अधिकतर चाय बागानों के मालिक भारतीय हैं। चाय का पौधा उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्यूमस और जीवन से युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवा क्षेत्रों में भली-भांति उगाया जाता है। चाय की झाड़ियों को उगाने के लिए वर्षभर उष्ण ताप एवं पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है।

वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इससे कोमल पत्तियों के विकास में सहायक होती हैं। इसके लिए प्रचुर मात्रा में सस्ता और कुशल श्रम चाहिए। चाय की ताजगी बनाए रखने के लिए इसकी पत्तियां बागान में संसाधित की जाती हैं। सन 2015 में विश्व में चीन और टर्की के बाद, भारत तीसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश था।

ख) भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएं और जहां यह पैदा की जाती है। उन क्षेत्रों का विवरण दें।

उत्तर. भारत के खाद्य फसल ‘चावल’ है। भारत में अधिकांश लोगों का खाद्यान्न चावल है। जिसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25 डिग्री सेल्सियस) से ऊपर तथा अधिक आद्रता (100 सेंटीमीटर ) से अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है।

चावल मुख्य रूप से उत्तर और उत्तर पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों तथा डेल्टाई-प्रदेशों में उगाया जाता है। नहरों के जाल एवं नलकूपों के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।

ग) सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रम की सूची बनाएं?

उत्तर. सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रम जिसमें चकबंदी सहकारिता तथा जमींदारों को समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई। सन 1960 से सन 1970 के दशकों में भारत सरकार ने कई प्रकार के कृषि सुधारों की शुरुआत की। इस टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रांति एवं श्वेत क्रांति जैसी कृषि सुधार के लिए कुछ रणनीतियां शुरू की गई थी। सन 1980 और 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम शुरू किया गया। जो संस्थागत तथा तकनीकी सुधारों पर आधारित था।

घ) दिन प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है। क्या आप इसके परिणामों की कल्पना कर सकते हैं?

उत्तर. कृषि के अंतर्गत भूमि कम होने से खाद में कमी आने से खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरा हो जाएगा। तथा हमारे देश में अनाज की कमी होने से हमें अकाल का सामना करना पड़ेगा। भारतीय कृषि में सुधार के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना, पशु चिकित्सा सेवाएं और पशु प्रजनन केंद्र की स्थापना, बागवानी विकास मौसम विज्ञान तथा मौसम के पूर्वानुमान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को वरीयता दी गई।

वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हुई है लेकिन इससे देश में पर्याप्त मात्रा में रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। कृषि में विकास दर लगातार कम हो रही है। जो कि एक चिंताजनक स्थिति है। वर्तमान में भारतीय किसान को अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से एक बड़ी चुनौती का सामना, कृषि सेक्टर में विशेष रुप से करना पड़ रहा है।

इसके अतिरिक्त कृषि उत्पादों पर आयात घटने से भी कृषि पर हानिकारक प्रभाव पड़ा है। किसान कृषि में पूंजी निवेश करने के करता रहे हैं। जिसके कारण कृषि में रोजगार घट रहे हैं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।
क) कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुजाइए।

उत्तर. कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निम्नलिखित सुधारों की शुरुआत की:-
i) पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रांति एवं श्वेत क्रांति जैसे कृषि सुधार के लिए कुछ रणनीतियां शुरू की गई थी।
ii) 1980 और 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम शुरू किया गया।
iii) बीमारी के लिए फसल बीमा के प्रावधान तथा किसानों को कम दर पर सुविधाएं प्रदान करने के लिए ग्रामीण बैंक को सरकारी समितियों और बैंकों की स्थापना सम्मिलित की गई।
iv) भारत सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना भी शुरू की।
v) किसानों को बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने के लिए न्यूनतम सहायता मूल्य एवं कुछ महत्वपूर्ण फसलों के लाभदायक खरीद मूल्यों की सरकार घोषणा करती है।

ख) भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर.भारत कृषि के लिए वैश्वीकरण कोई नई घटना नहीं है। 19वीं शताब्दी में जब यूरोपीय व्यापारी भारत आए, तो उस समय भी भारतीय मसाले विश्व के विभिन्न देशों में निर्यात किए जाते थे। ब्रिटिश काल में अंग्रेज व्यापारी भारत के कपास क्षेत्र की ओर आकर्षित हुए और भारतीय कपास को ब्रिटेन में सूती वस्त्र उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में निर्यात किया गया। 1917 में बिहार में हुए चंपारण आंदोलन की शुरुआत इसलिए हुई कि इस क्षेत्र के किसानों पर नील की खेती करने के लिए अंग्रेजों द्वारा दबाव डाला गया। नील ब्रिटिश के सूती वस्त्र उद्योगो के लिए कच्चा माल था। तथा किसान इसलिए भड़के क्योंकि उन्हें अपने उपभोग के लिए अनाज उगाने से वंचित कर दिया गया था।

1990 के पश्चात वैश्वीकरण के कारण भारतीय किसानों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चावल, कपास, रबड़, चाय, कॉफी , जूट तथा मसालों का मुख्य उत्पादक होने के बावजूद भारतीय कृषि विश्व के विकसित देशों में पैदा करने में सक्षम नहीं है। क्योंकि उन देशों में कृषि को अत्यधिक सहायता दी जाती है। आज भारतीय कृषि चौराहे पर खड़ी है। यदि भारतीय कृषि को सक्षम एवं लाभदायक बनाना है। तो सीमांत और छोटे किसानों की स्थिति सुधारनी होगी।

ग) चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें?

उत्तर.चावल की खेती खरीफ की फसल में आती है। भारत में ज्यादातर लोगों का खाना चावल है। जिसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25 डिग्री सेल्सियस) से ऊपर तथा अधिक आद्रता (100 सेंटीमीटर) इसमें अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। कई क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है। चावल मुख्य रूप से उत्तर और उत्तर पूर्वी मैदान और तटीय क्षेत्र तथा डैलटाई प्रदेशों में उगाया जाता है। नहरों के जाल एवं नलकूपों की संघता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।

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