सूर्यकांत त्रिपाठी निराला उत्साह और अट नहीं रही प्रश्न और उत्तर Class 10

Utsah Questions and Answers Class 10

प्रश्न 1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों? 

उत्तर: कवि ने बादल से फुहार डालने, रिमझिम या बरसने के लिए नहीं बल्कि गरजने के लिए कहा क्योंकि कवि क्रांतिकारी थे। वे समाज में बदलाव लाना चाहते थे इसलिए जनता में चेतना जागृत करने के लिए और जोश जगाने के लिए कवि बादल से फूहर, रिमझिम या बरसने के लिए ना कहकर ‘गरजने’ के लिए कहता है। क्योंकि कवि बादलों को क्रांति का सूत्रधार मानता है और ‘गर्जना’ विद्रोह का प्रतीक है।

प्रश्न 2. कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?

उत्तर: कवि क्रांति के लिए लोगों को उत्साहित करना चाहते हैं। कवि ने बादलों के माध्यम से लोगों में उत्साह का सृजन करने को कहा है। क्योंकि बादलों में भीषण गति होती है और उसी के कारण वह संसार के ताप हरता हैं। बादलों का गर्जना लोगों के मन में परिवर्तन करने का उत्साह भर देता है, इसलिए कविता का शीर्षक उत्साह रखा गया है।

प्रश्न 3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है।

उत्तर: कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है:

१. बादल प्यासे जन और तप्त धरती को शीतलता प्रदान करता है।

२. बादल गर्जन कर लोगों में क्रांतिकारी चेतना को जागृत करता है।

३. बादल जल बरसाकर सब को नया जीवन प्रदान करता है।

प्रश्न 4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव्या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छांटकर लिखें।

उत्तर: कविता की इन पंक्तियों में नाद-सौंदर्य मौजूद है- 

1. घेर घेर घोर गगन, धराधर ओ!

2.विद्युत-छबि उर में

3. ललित ललित, काले घुंघराले, बाल कल्पना के-से पाले

अट नहीं रही प्रश्न और उत्तर Class 10

प्रश्न 1. छायावाद की एक खास विशेषता है अन्तर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।

उत्तर: कविता के निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है कि प्रस्तुत कविता में अन्तर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाया गया है:

आभा फागुन की तन,

सट नहीं रही है।

और

कहीं सांस लेते हो,

घर-घर भर देते हो,

 उड़ने को नभ में तुम, 

पर पर कर देते हो, 

आँख हटाता हूँ तो,

हट नहीं रही है।

प्रश्न 2. कवि की आंख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

उत्तर: कवि की आंख फागुन की सुंदरता से इसलिए हट नहीं रही है क्योंकि फागुन बहुत मतवाला, मस्त और शोभाशाली है। इस महीने में प्रकृति का सौंदर्य अत्यंत मनमोहक होता है। चारों ओर फैली हरियाली और खिले रंग-बिरंगे फूल अपनी सुगंध से सब को मुग्ध कर देते हैं। इसलिए कवि की आंखें फागुन की सुंदरता से मंत्रमुग्ध है, जो चाह कर भी वहां से नहीं हटती।

प्रश्न 3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

उत्तर: प्रस्तुत कविता में कवि जीने फागुन की सर्वव्यापी सौंदर्य और मादक रूप के प्रभाव को दर्शाया है। पेड़ पौधे में पत्ते पाकर खेल रहे हैं फूलों की खुशबू वातावरण को सुगंधित कर रही है बाग बगीचों में चारों ओर हरियाली छा गई है डालिया कहीं हरी तो कहीं लाल पंक्तियों से भरी हुई हैं।

प्रश्न 4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

उत्तर: फागुन बाकी ऋतुओं से निम्नलिखित प्रकार से भिन्न है:

१. इस समय प्रकृति की शोभा अपने चरम पर होती है।

२. पेड़-पौधे नए पत्तों, फल और फूलों से लद जाते हैं।

३. हवा सुगंधित हो उठती है।

४. आकाश स्वच्छ होता है।

५. बाग-बगीचों और पक्षियों में उल्लास भर जाता हैं।

प्रश्न 5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएं बताएं।

उत्तर: महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘ जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनके काव्य-शिल्प की निम्नलिखित विशेषताएं हैं:

१. कविताओं में तत्सम शब्दों का प्रयोग उचित मात्रा में किया गया है।

२. कविताओं में अनुप्रास रूपक, यमक, उपमा आदि अलंकारों का प्रयोग अच्छे तरीके से किया गया है।

३. कविताओं की भाषा सरल, सहज, सुबोध और प्रवाहमयी है।

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