मुद्रा और साख नोट्स Class 10

Mudra Aur Sakh Notes Class 10

वस्तु विनिमय प्रणाली: वस्तुओं के बदले वस्तुओं का लेनदेन वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाता है।

वस्तुओं का दोहरा संयोग: जब एक व्यक्ति किसी चीज को बेचने की इच्छा रखता है वही वस्तु दूसरा व्यक्ति भी मुद्रा का उपयोग किए बिना खरीदने की इच्छा रखता है तो उसे आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहा जाता है।

मुद्रा के आविष्कार से वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे बड़ी कठिनाई “आवश्यकताओं का दोहरा  संयोग” का समाधान संभव हुआ।

कागजी मुद्रा: कागजी मुद्रा कागज के उपयोग से बने विभिन्न प्रकार के नोटों को कहते है।

धात्विक मुद्रा: धात्विक मुद्रा सोना, चांदी, निकल, तांबा आदि किसी भी धातु के उपयोग से बनी मुद्रा को धात्विक मुद्रा कहते हैं।

मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहा जाता है?

विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का कार्य करने के कारण, मुद्रा को विनिमय का माध्यम कहा जाता है।

मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में मान्य होती है?

मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में तभी मान्य होती है जब उस देश की सरकार उसे इस कार्य के लिए प्राधिकृत करती है व कानूनी मान्यता प्रदान करती है।

रिजर्व बैंक

भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया केंद्रीय सरकार की ओर से विभिन्न मूल्यों के करेंसी नोट जारी करता है।

बैंकिंग किसे कहते हैं?

उधार देने या निवेश करने के ध्येय से जनता से मांगने पर या चैक आदि के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जमाएं स्वीकार करने को बैंकिंग कहते हैं। बैंक, सहकारी समितियां आदि ऋण के औपचारिक स्त्रोत हैं।

अनौपचारिक ऋण में साहूकार, दोस्त, रिश्तेदारों आदि से लिया गया ऋण आता है।

समर्थक ऋणाधार – ऐसी संपत्ति है जिसका मालिक कर्जदार है और वह इस संपत्ति का उपयोग उधार दाता को गारंटी प्रदान करने के लिए करता है।

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