फसल प्रश्न और उत्तर Class 10

Fasal Questions and Answers Class 10

प्रश्न1. कवि के अनुसार फसल क्या है?

उत्तर: कवि ‘नागार्जुन’ जी के अनुसार फसल अपने आप उगने वाली कोई विशेष प्रकार की चीज नहीं है। फसल पर अनेक प्रकार की नदियों के अमृत समान जल का विशेष प्रभाव रहता है, फसल अनगिनत किसानों, मजदूरों के कठोर मेहनत के साथ-साथ सूर्य का प्रकाश, हवा और अनेक प्रकार की मिट्टी आदि का प्रभाव है। फसल उत्पादन में इन पंचमहाभूतों का विशेष और महत्वपूर्ण योगदान है।

प्रश्न 2. कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वह आवश्यक तत्व कौन कौन से हैं?

उत्तर: कविता में फसल को उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है, वह आवश्यक तत्व निम्नलिखित है:-

1. सूर्य का प्रकाश

2. पृथ्वी

3. जल

4. हवा

5. स्वयं मानव।

प्रश्न 3. फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

उत्तर: फसलों को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि ‘नागार्जुन’ यह व्यक्त करना चाहते हैं कि फसल उगाने के लिए दो या तीन नहीं बल्कि लाखों-करोड़ों किसानों व मजदूरों की आवश्यकता होती है, और फसल उगाने के लिए पंचमहाभूतों- मानव, पृथ्वी, जल, हवा, सूर्य आदि की भी आवश्यकता होती है। इनके बिना फसल उगाना संभव नही, मजदूरों वह किसानो के अथक परिश्रम के कारण फसल उगती व विकसित होती है। यह कहकर कवि ‘नागार्जुन’ ने किसानों और मजदूरों के लिए अपना आत्मीय लगाव दिखाया है।

प्रश्न4. भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) रूपांतर है सूरज की किरणों का सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

उत्तर: ‘फसल’ कविता में कवि नागार्जुन ने फसल की उत्पत्ति में सूरज और हवा का प्रमुख योगदान बताया है। नागार्जुन के अनुसार फसल अनेक तत्वों का मिश्रित रूप है। सूर्य की किरणों की ऊर्जा ही फसलों के रूप में परिवर्तित होती है और हवा और पानी फसलों को जीवन प्रदान करता है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न5. कवि ने फसल को हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुण धर्म कहा है

(क) मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?

(ख) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस तरह प्रभावित करती है?

(ग) मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है?

(घ) मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?

उत्तर: (क) खेतों में विभिन्न प्रकार की मिट्टियां पाई जाती है। इन मिट्टियों में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व एवं खनिज पदार्थ मिट्टी की उपजाऊपन को सुनिश्चित करते हैं। और यह मिट्टियां अपनी उपजाऊ शक्ति के गुण-धर्म के आधार पर ही फसल की उत्पत्ति करती है। अगर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति अधिक होगी तो फसल भी अधिक उत्पन्न होगी।

 (ख) जनसंख्या के बढ़ते दबाव के कारण खाद्य की मांग भी बढ़ी है। जिसने सारा बोझ फसलों की अत्यधिक पैदावार पर डाल दिया है जिसके कारण रसायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों का उपयोग बहुत बढ़ गया है। जो मिट्टी की उर्वरता को भी नष्ट कर रहीं है और हमारी सेहत को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।

(ग) अगर मिट्टी ने अपना गुणधर्म अर्थात पेड़-पौधों को पोषित करना छोड़ दिया तो धरती से हरियाली खत्म हो जाएगी। और फसलें ना उगने के कारण खाने की भी भारी कमी हो जाएगी। जिससे की धरती पर जीवन का नामो निशान मिट जाएगा और फिर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।

(घ) मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी निम्नलिखित भूमिका हो सकती है:

१. अधिक से अधिक वृक्षों को लगाए।

२. कारखानों को सीमित किया जाए।

३. प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें।

४. फसलों को उगाने के लिए रसायनिक तत्वों का उपयोग ना करें।

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